जिलाधिकारी से न्याय की गुहार: कथित फर्जी सर्वे व अवैध कब्जे का मामला गरमाया

भदोही,उजाला सिटी। जनपद भदोही में भूमि विवाद से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें पीड़ित पक्ष ने प्रशासनिक अधिकारियों पर फर्जी सर्वे, मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार करने और अवैध कब्जा दिलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। यह मामला औराई तहसील के ग्राम उपरोठ (नरथुआ क्षेत्र) से जुड़ा बताया जा रहा है। पीड़ित ने जिलाधिकारी भदोही को शपथपत्र सहित प्रार्थना पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।

शपथपत्र के अनुसार, पीड़ित अपने परिवार के साथ वर्षों से उक्त स्थान पर निवास एवं व्यवसाय करता चला आ रहा है। आरोप है कि 17 नवंबर 2025 को दिए गए प्रार्थना पत्र के क्रम में उपजिलाधिकारी न्यायिक के आदेश पर 12 दिसंबर 2025 को राजस्व टीम द्वारा सर्वे किए जाने की बात कही गई, जबकि वास्तव में मौके पर कोई सर्वे हुआ ही नहीं। इसके बावजूद कागजों में सर्वे दर्शाते हुए रिपोर्ट तैयार कर दी गई, जिसे पीड़ित ने पूरी तरह असत्य और मनगढ़ंत बताया है।

पीड़ित का कहना है कि उसके और उसके परिवार के दो पुश्तैनी कमरे लंबे समय से पक्की सड़क के किनारे स्थित हैं, लेकिन कथित सर्वे रिपोर्ट में उन्हें गलत तरीके से ग्राम नरथुआ की आराजी संख्या 712 में निर्मित दिखा दिया गया। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि उक्त निर्माण आराजी संख्या 1004 (रकबा 1.770 हेक्टेयर) में आता है। आरोप लगाया गया है कि यह सब विपक्षियों को लाभ पहुंचाने और निर्माण को विवादित दर्शाने की नीयत से किया गया।

मामले में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए भी आरोप लगाए गए हैं कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट में यह दर्शाने की कोशिश की गई कि विवादित कमरे को किराए पर दिया गया था और खाली कराने को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, जबकि पीड़ित का दावा है कि न तो कमरा किराए पर था और न ही किसी प्रकार का कब्जा विवाद मौजूद था।

आरोप यह भी है कि 13 अक्टूबर 2025 को राजस्व टीम और पुलिस बल की मौजूदगी में कथित तौर पर जबरन ताले तोड़कर दुकान का सामान बाहर फेंक दिया गया, जिससे पीड़ित को पांच लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। इतना ही नहीं, दीवानी न्यायालय में पूर्व से प्रभावी स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) होने के बावजूद उसका उल्लंघन किया गया, जिसे पीड़ित ने गंभीर अवमानना करार दिया है।

पीड़ित ने मांग की है कि पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों, लेखपाल, राजस्व कर्मियों और विपक्षियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए, कथित फर्जी सर्वे रिपोर्ट को निरस्त किया जाए, अवैध कब्जा हटवाया जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही परिवार को उनके पुश्तैनी कमरों पर पुनः कब्जा दिलाने की भी मांग की गई है।

फिलहाल मामला प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन बताया जा रहा है। अब देखना होगा कि जिलाधिकारी स्तर से इन गंभीर आरोपों वाले प्रकरण में क्या कार्रवाई की जाती है और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।