उजाला सिटी न्यूज़
उत्तर प्रदेश
लखनऊ
21/06/2026
प्रमाणित योग प्रशिक्षक एवं वेलनेस विशेषज्ञ
लखनऊ,उजाला सिटी। मेरे लिए योग केवल कुछ आसनों को करने या दिन में एक घंटे चटाई पर बिताने का नाम नहीं है। योग जीने का एक तरीका है। यह इस बात का चुनाव है कि हम कैसे सांस लेते हैं, कैसे सोचते हैं, परिस्थितियों पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और अपने जीवन को किस दृष्टिकोण से देखते हैं। मेरा मानना है कि यदि हमें जीना है, तो एक योगी की तरह जीना चाहिए, न कि भोगी या रोगी की तरह। योगी वह है जो जागरूकता, संतुलन, कृतज्ञता और आंतरिक शांति के साथ जीवन जीता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम उपलब्धियों, सुविधाओं और बाहरी सफलता के पीछे भागते-भागते स्वयं से दूर होते जा रहे हैं। हमने सफलता पाना तो सीख लिया है, लेकिन रुकना, स्वयं को सुनना और भीतर शांति का अनुभव करना भूल गए हैं। योग हमें फिर से अपने भीतर लौटने का मार्ग दिखाता है। यह हमें याद दिलाता है कि स्वस्थ जीवन केवल बीमारी का न होना नहीं है, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित होना ही वास्तविक स्वास्थ्य है।
मैं योग को आध्यात्मिक विकास और आत्म-परिवर्तन की एक समग्र प्रक्रिया मानती हूँ। योग शरीर को सशक्त बनाता है, मन को स्थिर करता है और चेतना को ऊँचा उठाता है। नियमित अभ्यास से हम अनुशासन, धैर्य, करुणा और आत्म-स्वीकृति सीखते हैं। योग हमें यह सिखाता है कि जीवन की परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, हम अपने केंद्र में स्थिर रह सकते हैं।
योग हमें वह देता है जिसकी आज के समय में सबसे अधिक आवश्यकता है—शांति और संतुलन। कुछ गहरी और सजग साँसें चिंतित मन को शांत कर सकती हैं। कुछ क्षणों का मौन हमें उन प्रश्नों के उत्तर दे सकता है, जिन्हें हम वर्षों से अपने भीतर ढो रहे होते हैं। प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से हम अपने विचारों और भावनाओं को समझना सीखते हैं, तनाव को कम करते हैं और मानसिक स्पष्टता विकसित करते हैं। योग से मिलने वाली शांति केवल कुछ समय का आराम नहीं, बल्कि धीरे-धीरे जीवन जीने का एक स्वभाव बन जाती है।
'योग' शब्द का अर्थ ही है—जोड़ना। शरीर, मन, श्वास और आत्मा का एकीकरण। साथ ही, यह व्यक्ति का प्रकृति और व्यापक चेतना से जुड़ने का माध्यम भी है। यही कारण है कि योग उम्र, पेशे और पृष्ठभूमि की सीमाओं से परे है। यह एक बच्चे के लिए उतना ही उपयोगी है, जो अपने शरीर को जानना सीख रहा है, जितना एक युवा के लिए, जो तनाव और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन खोज रहा है, और उतना ही एक वरिष्ठ नागरिक के लिए, जो स्वास्थ्य, ऊर्जा और मानसिक शांति चाहता है।
इसी भावना का सुंदर उदाहरण एम.आई. रिट्रीट सोसाइटी, अर्जुन गंज, लखनऊ में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देखने को मिला, जहाँ लगभग 100 प्रतिभागियों—बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक—ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस सत्र का संचालन प्रमाणित योग प्रशिक्षक शीतल सतेन्द्र मिश्रा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में वार्म-अप अभ्यास, श्वसन क्रियाएँ, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार तथा धनुरासन और चक्रासन जैसे विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों के उत्साह, मुस्कुराते चेहरों और सामूहिक ऊर्जा ने इस आयोजन को स्वास्थ्य, जागरूकता और सामुदायिक एकता का एक यादगार उत्सव बना दिया।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह स्वयं से पुनः जुड़ने, अपने भीतर झाँकने और जीवन को अधिक सजगता, शांति और संतुलन के साथ जीने का संदेश है। योग हमें सिखाता है कि वास्तविक सफलता केवल बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि एक शांत मन, करुणामय हृदय और संतुलित जीवन में निहित है।
अंततः, योग का उद्देश्य केवल शरीर को लचीला बनाना या कठिन आसनों में निपुण होना नहीं है। योग का वास्तविक उद्देश्य स्वयं को जानना, जीवन को पूरी जागरूकता के साथ जीना और हर परिस्थिति में अपने भीतर की शांति को बनाए रखना है। मेरे लिए यही योग का सच्चा अर्थ और सार है।