उजाला सिटी न्यूज़
उत्तर प्रदेश
लखनऊ
12/03/2026
लखनऊ,उजाला सिटी। ए.पी. सेन मेमोरियल गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में 12 मार्च 2026 को “भारतीय ज्ञान परंपरा में साहित्य, विज्ञान, संस्कृति एवं संस्कार” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत पौधे, प्रतीक-चिह्न तथा उत्तरीय भेंट कर किया गया।
प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने संगोष्ठी की विषय-प्रस्तावना प्रस्तुत की। मुख्य वक्ता आईआईटी कानपुर के प्रो. ए. के. शर्मा ने भारतीय सभ्यता के विकास में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका स्पष्ट करते हुए पाणिनी, सुश्रुत, आर्यभट्ट, जगदीश चंद्र बसु तथा मेघनाथ साहा जैसे विद्वानों के योगदान पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि लखनऊ विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. अरविन्द मोहन ने सिंधु घाटी सभ्यता के उन्नत जल प्रबंधन तंत्र को अद्वितीय बताते हुए भगवान राम के वनवास को ज्ञान-सृजन का महत्वपूर्ण कालखंड बताया। प्रबंध समिति के सदस्य प्रो. देवाशीष मुखर्जी ने भारतीय एवं पाश्चात्य ज्ञान परंपराओं का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर प्रो. निधि सिद्धार्थ, प्रो. मोनिका श्रीवास्तव, प्रो. माधुरी यादव, प्रो. ऊषा पाठक तथा प्रो. सीमा मिश्रा की पुस्तकों का विमोचन किया गया। संगोष्ठी में कुल चार तकनीकी सत्र आयोजित हुए, जिनमें दो ऑफलाइन एवं दो ऑनलाइन सत्र शामिल रहे, जिनमें विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 60 शोधार्थियों और फैकल्टी ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि राज्य सूचना आयुक्त प्रो. दिलीप अग्निहोत्री ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक जीवनदृष्टि है, जिसे अपनाकर भारत पुनः विश्वगुरु बन सकता है। अंत में डॉ. ऋचा मुक्ता ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. मनीषा पांडेय ने किया।