नौ मीटर की दूरी पर 90 मीटर का टावर

 
 गोमती नगर विस्तार के सेक्टर-4 में प्रस्तावित करीब 87.6 मीटर ऊंचे नर्मदा अपार्टमेंट के विरोध में रविवार को राप्ती रिवर व्यू एन्क्लेव के निवासी सड़क पर उतर आए। राप्ती रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरआरडब्ल्यूए) के नेतृत्व में दोपहर 12 बजे हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित टावर और राप्ती अपार्टमेंट के बीच महज करीब नौ मीटर की दूरी को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
 
प्रदर्शन स्थल पर “2009 में सपना, 2025 में सदमा” और “हमने नदी देखकर घर लिया, अब सामने 90 मीटर की दीवार क्यों?” जैसे बैनर लगाए गए। निवासियों का कहना है कि जिस क्षेत्र को उन्होंने खुले और निम्न-ऊंचाई वाले आवासीय इलाके के रूप में देखा था, वहां अब करीब 30 मंजिल ऊंचा टावर प्रस्तावित किया जा रहा है।
 
निवासियों के मुताबिक परियोजना के पहले चरण में 312 फ्लैट हैं, जबकि रेरा में पूरी परियोजना के लिए 951 इकाइयां दर्ज हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि मुख्य पहुंच मार्ग लगभग नौ मीटर का है। उनका कहना है कि स्थल तीन ओर से बाधित होने के कारण आपातकालीन स्थिति में हजारों लोगों की सुरक्षित निकासी और दमकल वाहनों की पहुंच बड़ी चुनौती बन सकती है।
 
निवासियों ने सवाल किया कि 87.6 मीटर ऊंचे भवन में आग या अन्य आपदा की स्थिति में दमकल की हाइड्रोलिक सीढ़ियां और राहत उपकरण कहां तैनात होंगे? उनका कहना है कि भवन के भीतर पर्याप्त सीढ़ियां होने के बावजूद बाहरी आपात पहुंच का पर्याप्त होना जरूरी है।
 
प्रदर्शनकारियों ने वर्ष 2021 के सुप्रीम कोर्ट के सुपरटेक बनाम एमराल्ड कोर्ट मामले का हवाला देते हुए कहा कि भवनों के बीच पर्याप्त दूरी का संबंध केवल नक्शे या नियमों से नहीं, बल्कि आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी, रोशनी और हवा के आवागमन से भी है।
 
आरआरडब्ल्यूए ने एलडीए और अग्निशमन विभाग से परियोजना की फायर एनओसी, स्वीकृत फायर एवं इवैक्यूएशन प्लान और आपातकालीन वाहनों की पहुंच से संबंधित तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।
 
निवासियों ने प्रस्तावित स्थल के भू-उपयोग को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि भूखंड के पूर्व निर्धारित उपयोग में बदलाव किया गया है और इस प्रक्रिया में सार्वजनिक आपत्तियों से जुड़े प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए।
 
आरआरडब्ल्यूए ने जोनल विकास योजना, एफएआर और भवन की प्रस्तावित ऊंचाई से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि परियोजना को स्वीकृति देने से पहले क्षेत्र की मौजूदा आबादी, यातायात, अग्नि सुरक्षा, पर्यावरण और बुनियादी सुविधाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का स्वतंत्र तकनीकी अध्ययन कराया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सेक्टर-4 में पहले से मौजूद आवासीय भवन करीब 12 मंजिल और लगभग 38 मीटर ऊंचाई के हैं। ऐसे में करीब 87.6 मीटर का टावर क्षेत्र की मौजूदा संरचना से दो गुने से भी अधिक ऊंचा होगा। उनका आरोप है कि इससे इलाके में धूप, हवा, यातायात और खुले स्थानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सामने दिल्ली पब्लिक स्कूल होने के कारण प्रदर्शनकारियों ने भविष्य में यातायात दबाव बढ़ने की आशंका भी जतायी. राप्ती रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने परियोजना की सभी स्वीकृतियों की स्वतंत्र तकनीकी और कानूनी जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक निर्माण संबंधी गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की। संगठन ने प्रस्तावित नर्मदा अपार्टमेंट परियोजना को निरस्त करने की मांग भी की।
 
प्रदर्शन में ओपी श्रीवास्तव, डॉ. एसके गोयल, अभय सिंह, यूसी राय, यूएस दुबे, रवि भूषण, एनके सिंह, डी के राय, एस के सिंह, वीएन सिंह, डॉ. कृष्णा रोहित, डीपी सिंह, आलोक मिश्रा, गौरव सिंह, ए. कुमार, मनीष शुक्ल और पूनम गोयल समेत बड़ी संख्या में निवासी शामिल रहे।