खास खबर

बात कोई ज्यादा पुरानी नहीं है वर्ष 2008 में मै और मेरे कुछ कर्मठ पत्रकार सहकर्मियों ने सोंचा की हम लोग लोकतंत्र का चौथा खम्भा कहे जाते हैं मगर हम पूरी निष्ठा से पत्रकारिता का फर्ज नहीं निभा पाते हैं बस फिर क्या था यह ख्याल मन में आते ही बना डाली एक स्वयंसेवी संस्था उजाला सेवा संस्थान और पत्रकारिता के माध्यम से सुरु किया आमजन में जागरुकता लाने का प्रयास,लेकिन NGO की भी सीमाएं होती हैं इसलिए फिर एक नया पड़ाव वर्ष 2009 में उजाला सिटी न्यूज़ चैनल की शुरुआत करके पत्रकारिता में और अपने कदम बढ़ाये। परन्तु वर्ष 2011 में लोकल न्यूज़ चैनल बंद होने के बाद उजाला सिटी हिंदी और उर्दू में समाचार पत्र प्रकाशन के साथ ही वेब पोर्टल के माध्यम से पुरे विश्व में अपनी आवाज़ पहुंचाई। आज हमारा यह न्यूज़ पोर्टल जनता की आवाज बन रहा है|

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