“जलज यादव की स्मृति में रूपकृति छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ” –

“जलज यादव की स्मृति में रूपकृति छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ” –
लखनऊ, युवा फोटोग्राफर जलज यादव ( मूल निवासी प्रयागराज) को याद करते हुए उनके स्मृति में उन्ही के छायाचित्रों की प्रदर्शनी “रूपकृति” लखनऊ स्थित सराका आर्ट गैलरी , होटल लेबुआ , माल एवेन्यू में दिनांक 4 दिसंबर 2020 को सायं 3:30 बजे लगाई गई। इस प्रदर्शनी का क्यूरेशन  वंदना सहगल ने किया।
प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रदेश के वरिष्ठ फोटोग्राफर अनिल रिसाल ने दीप प्रज्वलित कर के किया। इस दौरान जलज के फोटोग्राफी के एक पोर्टफ़ोलियो भी जिसमे जलज यादव की समग्र स्मृतियों को साझा करते हुए रिलीज किया गया। इस अवसर पर आईएएस नवनीत सहगल,वंदना सहगल, पूर्व जज राकेश शर्मा, मिस्टर अब्दुल्ला, राजन एस फुलारी, त्रिलोचन कालरा, रवि कपूर, गौरव मिश्रा, भूपेंद्र अस्थाना, धीरज यादव, आदित्य हवेलियां, प्रो. राकेश चंद्रा सहित तमाम वरिष्ठ कलाकार, फोटोग्राफर, कलाप्रेमी लोग उपस्थित रहे।
ज्ञातव्य हो कि 23 अक्टूबर 2020 को युवा फोटोग्राफर जलज यादव (28 वर्ष) की आकस्मिक निधन हो गया था । जलज एक अच्छे युवा फोटोग्राफर थे। जिन्होंने अपने कम आयु में एक पहचान स्थापित की है।
छायाचित्र प्रदर्शनी के क्यूरेटर वंदना सहगल ने जलज की छायाचित्रों पर एक विस्तृत लेख भी साझा किया जो पोर्टफोलियो में शामिल किया गया। जिसमें उन्होने ने बताया है कि जलज यादव ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से फोटोग्राफी में अपना कोर्स पूरा किया और 3 साल से फोटोग्राफी में कार्य कर रहे थे।
जलज यादव की तस्वीरें एक अलग दृष्टिकोण से सामान्य की झलक देती हैं जो दर्शक को फिर से सोचने और समझने पर मजबूर कर देती है। उन्होंने प्रकृति, वास्तुकला, सड़क के लोगों, चित्र और सार जैसे विभिन्न विषयों को अपने छायाचित्रों में शामिल किया। उनकी रचनात्मकता पल, या प्रकाश की तरह, या शॉट के अलग-अलग कोण, या पोजिशन और कभी-कभी विस्तार के कारण जीवित हो जाती है, अपनी कला को खुद के लिए बोलती है। इसलिए उनकी तस्वीरें वास्तव में दर्शक से बात करती हैं और कहानी बुनती हैं और कभी-कभी संदेश देती हैं। उनका मानना ​​था कि एक तस्वीर का सरासर विचार यही होता है कि हम उस पल को कैद करलें और ऐसा करने के लिए, समय सबसे महत्वपूर्ण होता है और इसका मतलब था । उनके अनुभव फोटोग्राफी में अच्छा था। उनके अनुसार फोटोग्राफी को प्रभाव पैदा करने के लिए बहुत रचनात्मकता, कई नए आयामों की आवश्यकता थी। ‘आम के सिद्धांत अधिक जानबूझकर और उद्देश्यपूर्ण थे।।स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी पर उनका ध्यान इस मायने में अद्वितीय था कि वे असामान्य को पकड़ लेंगे और इसे जीवन से बड़ा मान लेंगे। उसके तख्ते में स्थूलता, कुरूपता, स्पष्टता का दूसरा पक्ष अधिक दिखाई देगा। अपने शब्दों में, वह अपनी तस्वीरों के माध्यम से अपने विचारों को दिखाना चाहते थे, सड़क पर हुई भावनाओं का अनुवाद उन दर्शकों के लिए करते थे जो वहां मौजूद नहीं थे। जलज के लिए, फोटोग्राफी इस माध्यम से इन कहानियों, क्षणों, भावनाओं को संप्रेषित करने का एक माध्यम था
उनकी एक और श्रृंखला ‘आइडल मेकर्स’ पर थी, जहाँ उन्होंने नवरात्रों से पहले दुर्गा के रचनाकारों के भीड़भाड़ वाले कार्य स्थलों का चित्रण किया था। उलटे सिर ऊपर की ओर अलमारियों में व्यवस्थित, बिना सिर के, हाथों में काले और सफेद रंग में जगह लिए हुए कई हाथ सर्पिल थे और फिर भी उनमें वास्तविकता की स्थिरता थी। रचनाकार के नंगे पैर के साथ अनगिनत नंगे पैरों ने एक विचित्र व्यंग्य किया, लेकिन मूर्ति को मानने के विचार से भी अवगत कराया। उनमें से एक निर्माता को मूर्ति के साथ मिलता है, शाब्दिक रूप से मूर्ति के निर्माता को मूर्ति के रूप में खड़ा करता है। एक अन्य में, अपने कंधे पर राक्षस के सिर को ले जाने वाला निर्माता इसके साथ एक हो जाता है, जबकि दूसरे में, निर्माता का राक्षसी पैर राक्षसी जानवर पर चढ़ता है, जिससे वह खुद बुराई का कातिल बन जाता है। इन चित्रों में एक विचित्र एहसास है
भूपेंद्र अस्थाना ने यह सूचना देते हुए आगे बताया कि जलज यादव …..एक युवा सोच के कलाकार और उभरते हुए फोटोग्राफर थे। यदि इस प्रकार असामयिक निधन नहीं होती तो आने वाले समय मे एक कुशल फोटोग्राफर की श्रेणी में होते। जलज यादव का जन्म इलाहाबाद ( वर्तमान प्रयागराज) में 8 फरवरी 1990 को हुआ था। इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से फोटोग्राफी में स्नातक किया। और फोटोग्राफी की दुनियां में एक पहचान बनाने के लिए संघर्ष शुरू किया।
घर मे शिक्षा का माहौल रहा क्योंकि इनके पिता  रमेश चंद्र यादव जो कि एक इंटर कॉलेज में अध्यापक रहे। दो बड़े भाई जो एक बड़े कोचिंग सेंटर स्थापित किया और दूसरे भाई डिज़ाइनर और इनके तीसरे भाई धीरज यादव जो एक उत्तर प्रदेश के युवा चित्रकार के रूप में जाने जाते हैं। सब मिलाकर कला और शिक्षा का सुंदर वातावरण मिला। जिस वातावरण में जलज ने अपने आपको सुरक्षित और ऊर्जावान के रूप में अपने रुचि को एक स्तर पर स्थापित करने के लिए सदैव तत्पर रहे। इन्हें सबसे ज्यादा समझने और प्रोत्साहित करने वाले इनके बड़े भाई धीरज यादव रहे। जो इन्हें कला और फोटोग्राफी की दुनिया हो रहे प्रयोग और बदलाव की समय समय पर जानकारी देते रहे और प्रयासरत रहने की सीख देते रहे और जलज अपने कदम धीरे धीरे फोटोग्राफी के क्षेत्र में जमाने की कोशिश करते रहे।
जलज को इनके फोटोग्राफी के लिए कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले तथा फोटोग्राफ को चयनित भी किया गया। 2017 और 2018 में प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रफुल्ला दहानुकर पुरस्कार,2019 में फेलिक्स स्कूल फोटोग्राफी पुरस्कार, अविष्कार फ़ोटो सलोन अवार्ड तथा नेशनल जियोग्राफी में भी छायाचित्र चयनित किये गए। इस प्रकार अनेको सामूहिक प्रदर्शनियों में भी इनके छायाचित्रों को प्रदर्शित किया गया। साथ ही कई आर्ट कैम्प में भी भाग लिया।
मुलाक़ातों और बातचीत में मुझे यह पता चला की जलज को फोटोग्राफी का शौक़ फोटोग्राफी स्नातक करने से पहले ही था। जिसके कारण बाद में उसी रुचि ने इस क्षेत्र में लाया। जलज को फोटोग्राफी की बारीकियां अच्छे से पता थीं जो उनके फ़ोटो में देखने को मिलती हैं। जलज कहते थे कि ” फोटोग्राफी में मुझे नए आयामों की खोज करना अच्छा लगता है। मेरी फोटोग्राफी सबसे पहले सड़क से शुरू हुई जहाँ विषय व्यापक और खुले रूप में मिल जाते हैं। मुझे लगता है मेरे लिए फोटोग्राफी में मेरे स्वयं का विस्तार है। कला वह नहीं जो आप देखते हैं। मैं चीजों को करीब से देखता हूँ और उसे महसूस करता हूँ और अपने फोटोग्राफी का हिस्सा बनाता हूँ। मैं यही चाहता हूँ कि मैं अपने फोटोग्राफ में जो महसूस करता हूँ दर्शक भी उसे महसूस करे ” । जलज ने बात चीत में बताया था कि फ़ोटोग्राफ़ी हमारी सोच को पूरी शक्ति प्रदान करती है। मैं आमतौर पर रचनात्मकता के साथ तस्वीरें खींचना पसंद करता हूं। मेरे लिए, रचनात्मकता दर्शकों को सबसे अधिक प्रभावित करती है जब एक नए और अलग तरीके से शॉट्स आते हैं। मेरा लक्ष्य रहता है कि पूरी तरह से अलग तरीके से शॉट लिया जाए। मैं हमेशा एक नया आयाम चुनता हूं । जिससे मैं एक नया शॉट बना पाता हूँ। मैंने कभी फोटोग्राफी के लिए कोई विशेष श्रेणी नहीं चुनी क्योंकि मुझे हमेशा इसमें सभी स्ट्रीम के साथ चुनौती मिलती है। मुझे स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी में एक कहानी बनाने में मज़ा आता है, जहाँ अनदेखी घटनाएँ बहुत मनोरंजक होती हैं और मेरे लिए अपने तरीके से उन क्षणों को कैद करना एक चुनौती बन जाता है। तस्वीरें लेना मेरे लिए सांस लेना और फोटोग्राफी मेरा ब्रह्मांड है। मैं अक्सर आसपास के क्षणों को न केवल अपने लिए कैप्चर करने के लिए जागरूक रहता हूं, बल्कि मैं दर्शकों को भी अपनी आंखों और अपने विचारों से रूबरू कराने का प्रयास करता हूं।
जलज ने दुर्गा सीरीज पर बहुत काम किया है। दुर्गा की मूर्ति बनाते हुए उन स्थानों पर जा कर अपने विचारों के साथ फोटोग्राफी की है। जो बहुत ही अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करतीं हैं। यह प्रदर्शनी 3 जनवरी 2021 तक सराका आर्ट गैलरी में लगी रहेगी।

 

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