ऐक्रेलिक माध्यम में बने चित्रों के ख़ास ख़ास बारीकियों से अवगत हुए प्रतिभागी।

ऐक्रेलिक माध्यम में बने चित्रों के ख़ास ख़ास बारीकियों से अवगत हुए प्रतिभागी।

लखनऊ।अस्थाना आर्ट फोरम के ऑनलाइन मंच पर आर्ट अवेयरनेस एंड एक्रिलिक पेंट्स विषय पर दो दिवसीय ऑनलाइन टॉक-विद-वर्कशाप हुई । इस वर्कशॉप में विशेषज्ञ के रूप में उत्तर प्रदेश के युवा चित्रकार धीरज यादव रहे। जिन्होंने इस दो दिवसीय टॉक- विद- वर्कशॉप में काशी के सुंदर घाट के किनारे बने मंदिरो के झुंड को टॉप व्यू और पर्सपेक्टिव को ध्यान में रखते हुए एक चित्र जो कि ऐक्रेलिक माध्यम में किया। इस ऑनलाइन वर्कशॉप में निकुन अग्रवाल, सबीहा सुल्ताना, नविषा गुजराती,ऋषभ राज,मोनिका राजपूत,प्रकाश ढोमने, माधुरी गयावाल, शलाका ,अनन्या, बैट्रिस मोसेस, रत्नप्रिया, डॉ सरिता द्विवेदी,सुचिता, उत्कर्ष, सतीश के., सौमाली देबनाथ,अदिति डेके, महेंद्र सिंह,मोनल,भारवी त्रिवेदी,मधु अस्थाना,एस एस नेगी ,प्रीति दास ने भाग लिया जिसमे उत्तर प्रदेश,दिल्ली,असम,छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, हैदराबाद, बंगलौर, मुम्बई, पुणे से प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जिसमे छात्राओं के साथ वरिष्ठ ने भी भाग लिया। इस वर्कशॉप में धीरज यादव ने एक्रिलिक पेंटिंग की बारीकियों के बारे में लोगों को अवगत करवाया।

धीरज यादव ने ऐक्रेलिक माध्यम में बने चित्र और बहुत ही बेसिक रेखांकन और रंगों के प्रयोग को इस्तेमाल की भी विशेष जानकारी देते हुए आगे बताया कि ऐक्रेलिक पेंटिंग करने की एक चित्रात्मक तकनीकी है। ऐक्रेलिक जल्दी से सूख जाता है, सूखने के बाद भी, ऐक्रेलिक उल्लेखनीय रूप से लचीला रहता है, जिसका अर्थ है कि यह बिना दरार या दरार के सबसे गैर-चमकदार गैर-चिकना सतहों पर लागू किया जा सकता है। रंगों को कई परतों में लागू किया जा सकता है और, उपयुक्त निपुणता के साथ, तस्वीर को सूखने के बाद भी रोल किया जा सकता है।
भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने बताया कि इसी कार्यशाला और बातचीत के श्रृंखला में 16 अगस्त को एब्स्ट्रैक्ट पर वर्कशॉप “एब्स्ट्रैक्ट इन नेचर ” नागपुर से सुहानी जैन , 17 व 18 अगस्त को द मेकिंग ऑफ गणेशा जो गणेश चतुर्थी के विशेष पर्व पर पेपर मैसी में असम से विनय पॉल और 19 व 20 अगस्त को सेल्फ पोर्ट्रेट पर मुम्बई से विक्रांत बिशे द्वारा किये जायेंगे।

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