सीधी और सरल रेखाएं मानस पटल पर तीव्र और गहरी प्रभाव छोड़ती हैं – अरुण सिंह

सीधी और सरल रेखाएं मानस पटल पर तीव्र और गहरी प्रभाव छोड़ती हैं – अरुण सिंह

अलीगंज ललित कला अकादमी क्षेत्रीय केंद्र में शीर्षक “इमेजेस फ्रॉम एजेस” प्रदर्शनी का शुभारंभ

लखनऊ । जब मनुष्य को लिखना भी नहीं आता था या कोई भाषा बोलना भी नहीं जानते थे उससे भी पहले कला का इतिहास है जिसका प्रमाण हमारे सामने मौजूद है । हम जब शब्दों के माध्यम से किसी चीज को व्यक्त नहीं कर पते तो वहां चित्रों के माध्यम से व्यक्त करके बड़े ही आसानी से लोगों तक अपनी बातों को पहुंचते हैं जो सबसे सरल और सहज माध्यम है । चित्रकार अपने चित्रों के माध्यम से हर काल में हो रही घटनाओं को अपने कला अभिव्यक्ति के माध्यम से सदैव समाज को जागरूक और जानकारी प्रदान करता रहा है दरअसल यही वह विधा है जो समाज के हर वर्ग के लोगों को दृश्य माध्यम से सम्बोधित करता है यह खुद में एक भाषा है और हमारे भारत के महाकाव्यों में वर्णित समय समय पर घटनाओ का बखान आज भी लोग बड़े ही चाव से किसी न किसी माध्यम में करते ही रहते हैं ।
इसी श्रंखला में एक और कड़ी जोड़ने का प्रयास बनारस के वरिष्ठ चित्रकार और शिल्पकार अरुण सिंह ने किया हैं जो अपने चित्रों और शिल्पों के एकल प्रदर्शनी के माध्यम से भारतीय इतिहास के खास पहलुओं को अपनी खास शैली में प्रस्तुत किया है । आज अलीगंज स्थित ललित कला अकादमी क्षेत्रीय केंद्र में शीर्षक “इमेजेस फ्रॉम एजेस” प्रदर्शनी लगाई गई जिसका उद्घाटन वरिष्ठ कलाकार श्री जय कृष्ण अग्रवाल ने किया, अरुण सिंह की यह प्रदर्शनी ” इमेजेस फ्रॉम एजेस ” (images from ages) भारतीय इतिहास के अलग अलग काल में घटित ऐसी दुर्लभ घटनाओं का प्रतीकात्मक चित्रण है जो विश्व की दूसरी महान सभ्यताओं में भी नहीं देखी जाती अरुण सिंह के 26 चित्रों का विषय भारतीय महाकाव्यों के कुछ अंश हैं जैसे दशावतार, जिसे अमूमन लोग विष्णु का अवतार मानते हैं दरअसल यह मानव जाति का इतिहास है जो की मानव जाति के जीवन के विकास क्रम है , जब जीवन जल में था तो मत्स्यावतार था ,जब जीवन जल और धरती दोनों पर हुआ तो कच्छप या संयुक्त हुआ , जब जीवन दलदल जैसे स्थिति में आई तो वराह हुआ फिर आदिमानव युग , नरसिंघ , परसुराम, वामन ,राम जिसका अर्थ धनुर्धारी यानि जो शिकार कर सके ,अपनी रक्षा कर सके , कृष्ण चक्रधारी जिसका अर्थ जिसके पास पहिया हो जैसे कुम्हार के पास चाक,रथ चल सके , हलधर यानि किसान (ग्रामीण जीवन) , मानना कृष्ण की दीवानी मीरा हो ,अशोक वाटिका में सीता , बुद्ध और आनंद ,राम को जूठे बेर खिलाती शबरी हो ,गुरू को दक्षिणा स्वरूप अंगूठा देने वाला एकलव्य हो ,ऱाजा उदय सिंह की प्राण रक्षा के लिए अपने बच्चे को आखों के सामने कत्ल होते देखने वाली महान माँ पन्ना धाय हो ,क्रोन्च की पीड़ा महसूस करने वाले वाल्मिकी हों या सुन्दर आभा के साथ हाथ में गागर लिए माँ गंगा हो ,प्रेम के हर आयाम को स्पर्श करने वाले भारत के दुर्लभ इतिहास के एक छोटे से भाग की प्रस्तुति है ।
अरुण सिंह के चित्र बहुत ही सरल और सहज हैं जिन्हे आम व्यक्ति भी आसानी से समझ सकता है इनके चित्रों में सीधी सरल रेखाओं जो ज्यामितीय रूप लिए हुए हैं। इस सन्दर्भ में बात चीत में चित्रकार ने बताया कि सीधी सरल रेखाओं में बनी आकृति मानव के मानस पटल पर जल्दी और गहरा प्रभाव छोड़ती है । इनके चित्रों का माध्यम ऐक्रेलिक और कैनवास, स्याही और सैंड स्टोन है । जिसमे रंगों कि बात करें तो श्याम स्वेत और लाल ,पीले,हरे की प्रचुरता है इस पर अरुण सिंह का कहना है की ” मेरे लिए श्याम स्वेत का कोई विकल्प नहीं यह स्त्री पुरुष की तरह है यानी प्रभावशाली परंपरा में चित्रण का सबसे खास माध्यम है रंग , संयोजन को सुन्दर और मनोहारी या भावपूर्ण बनाने का माध्यम मात्र है । आगे की अपनी योजना पर प्रकाश डालते हुए चित्रकार ने बताया की भारतीय इतिहास के विभिन्न घटना क्रम को विभिन्न शैलियों में चित्रण कर इतिहास के खास पहलुओं को सौंदर्य बोध के साथ आम जन के बीच प्रवाहित करना है ।
भूपेंद्र अस्थाना ने बताया कि कलाकार अरुण सिंह बनारस के रहने वाले हैं जिनके सिर से पांव तक काशी रचा बसा है । इन्होने लखनऊ कला एवं शिल्प महाविद्यालय से 1998 में कला में स्नातक किया इसके बाद कला के क्षेत्र में अपना योगदान लगातार देते आ रहे हैं । बनारस के बहुत से स्थानों पर इनके बनाये हुए मूर्तिशिल्प,म्यूरल लगे हुए हैं जो काशी कि शोभा बढ़ा रहे हैं । अरुण सिंह चित्रकला और मूर्तिकला दोनों विधा में पारंगत हैं और दोनों ही विधा में कार्य कर रहे हैं । इन्होने अनेक लम्बी पेंटिंग्स का निर्माण किया है जैसे 1857 से 1947 के स्वतंत्रता आंदोलन कि तमाम घटनाओं को ” छोटा समय लम्बा इतिहास ” जो कि मात्र रेखाओं के माध्यम से बनाई गई थी जो 120 फिट लम्बी अखबारी कागज़ों पर बनाये गए थे। इस प्रकार अरुण सिंह ने अपनी अभिव्यक्ति को आयामित किया है और कर भी रहे हैं ।

 

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