अखिल भारतीय पोस्टकार्ड कला प्रदर्शनी का भव्य-शुभारम्

अखिल भारतीय पोस्टकार्ड कला प्रदर्शनी का भव्य-शुभारम्
लखनऊ। सप्रेम संस्थान के तत्त्वावधान में डॉट आर्ट फाउंडेशन के सहयोग द्वारा लखनऊ के अलीगंज स्थित ललित कला अकादमी क्षेत्रीय केंद्र में भारतीय सेना को समर्पित अखिल भारतीय पोस्टकार्ड कला एवं कविता प्रदर्शनी का आज भव्य शुभारम्भ हुआ। उत्तर-प्रदेश में पहली बार इस तरह का आयोजन किया जा रहा है, जिसमे चित्रकला व छायाचित्र के साथ ही कविता, लेख, कार्टून्स, कथन /सूत्र-वाक्य (slogan) जैसे कला के और अन्य विधाओं व माध्यमों को भी पोस्टकार्ड पर प्रदर्शित किया गया है, जो इस प्रदर्शनी की एक अद्वितीय व मनमोहक रूप देने का कार्य कर रही है। इस प्रदर्शनी में भारत के लगभग सभी प्रदेशों से 350 कलाकारों द्वारा प्रेषित लगभग 450 से भी ज़्यादा कलाकृतियों की अभिव्यक्ति शामिल है।
प्रदर्शनी का उदघाटन भारतीय सेना के मेजर जनरल प्रवेश पूरी (जनरल ऑफिसर कमांडिंग मध्य उत्तर प्रदेश), प्रधान सचिव गांधी ग्रामोद्योग नवनीत सहगल (सीनियर आई ए एस) उत्तर प्रदेश सरकार
तथा विशिष्ट अतिथि में कारगिल युद्ध मे शहीद कैप्टन मनोज कुमार के पिता गोपी चंद पांडेय, लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक कुमार केशव, उत्तर प्रदेश लखनऊ दूरदर्शन के कार्यक्रम अधिशाषी आत्मा प्रकाश मिश्रा, एवं संत निरंकारी मिशन व निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन दिल्ली के एडमिनिस्ट्रेटिव कोऑर्डिनेटर मोहन छाबड़ा जी द्वारा फीता काटकर एवँ दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया। अतिथि व विशिष्ट अतिथि के साथ ही भारतीय सेना के तीनों रूप जल-थल व नभ सेना के सदस्य भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक-आध्यात्मिक, सरकारी व कार्पोरेट जगत, प्रिंट व डिजिटल मीडिया, साहित्य व कला के अनेकों क्षेत्रों से भी लोग भी सम्मलित होंगे।
सप्रेम संस्थान की प्रणेता सरोज अस्थाना (आज़मगढ़) व अध्यक्ष डॉ. पुष्पेंद्र अस्थाना “पुष्प” (वाराणसी), व उपसचिव ईजी. धर्मेन्द्र अस्थाना (दिल्ली) सहित सुप्रसिद्ध युवा कवि विवेक “रफ़ीक़” जी भी भी मुख्य रूप से शामिल रहे। कला,साहित्य संस्कृति से जुड़े सभी कलाकार, कवि गणमान्य लोग भारी संख्या में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सप्रेम संस्थान द्वारा एक प्रदर्शनी की पृष्ठिभूमि पर एक विशेष गीत का विमोचन भी किया गया।अत्यंत मनमोहक व भारतीय सेना पर आधारित इस गीत को संगीत से सजाया है, भारतीय नौ-सेना के संगीतकार कौशल श्रीवास्तव ने आवाज़ दिया है गीतकार व गायक धर्मेन्द्र अस्थाना ने। प्रदर्शनी में मुख्य रूप से सम्मलित भी हुए। कार्यक्रम का सफल संचालन आकाशवाणी की मशहूर RJ शालिनी ने किया।
प्रदर्शनी के विषय में जानकारी देते हुए सप्रेम-संस्थान के प्रबंधक तथा प्रदर्शनी के क्यूरेटर भूपेंद्र अस्थाना एवं धीरज यादव ने बताया कि पोस्टकार्ड पर सृजन के चिन्तन और अभिव्यक्ति की अद्भुतता ”
कला एक विचार है। विचारों की अभिव्यक्ति ही कलाकार विभिन्न माध्यमों के जरिये संप्रेषित करता है।
यह प्रदर्शनी एक लंबे समय का शोध कार्य है। जिसके बारीक से बारीक पहलुओं को लेकर काफी विचार और चर्चा के बाद इस रूप में प्रस्तुत किया गया। मैं (भूपेंद्र कुमार अस्थाना) और मेरे मित्र चित्रकार धीरज यादव जब इस प्रदर्शनी का रूप रेखा तैयार कर रहे थे तो अनेको मुश्किलों को दरकिनार करते हुए एक उच्च स्तरीय कला प्रदर्शन पर विचार किया गया। इसके विषय और उद्देश्य को लेकर कला के विविध आयामों के साथ प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया। अंत मे विषय के रूप में भारतीय सेना को केंद्र में रखते हुए पोस्टकार्ड को कैनवास के रूप में प्रयोग करने का निर्णय लिया गया। क्योंकि दोनों ही ( सेना और पोस्टकार्ड) एक आम आदमी के जीवन से बहुत ही सहज और सरल तरीके से जुड़ा हुआ है। पोस्टकार्ड संदेश भेजने का सरल और सस्ता माध्यम रहा है।
इस प्रदर्शनी को डिजाइन करते हुए यह महसूस किया गया कि डाक नेटवर्क आज भी व्यापक स्तर पर है और देश के दूरस्थ क्षेत्रों तक आसानी से पहुंचता है। इसी तर्ज पर प्रदर्शनी का शीर्षक” पोस्ट कार्ड पर भारतीय सेना को सलाम” रखा गया।
पोस्टकार्ड हमारे जज्बातों या सूचनाओं के सम्प्रेषण का सिर्फ एक माध्यम ही नहीं है बल्कि ये लिखने वाले, प्राप्त करने वाले और सूचनाओं को सम्प्रेषित करने वाले व्यक्तियों के अन्तर्मन में छिपे भावों का स्पन्दन, वन्दन और क्रन्दन है, इस प्रदर्शनी पोस्टकार्ड के धीरे-धीरे से लुप्त हो रहे चलन को कला सृजन के माध्यम से हम सब आमजन के बीच लाने का एक अनूठा आन्दोलन भी है। आज इंटरनेट और ईमेल के ज़माने में लोग भले ही चिट्ठी पत्री के परंपरागत जरिये को भूलते जा रहे हों, अंतरदेशीय और पोस्टकार्ड के नाम से वाकिफ न हों, लेकिन आज भी पोस्टकार्ड की कितनी अहमियत है, इसे कुछ कलाकार शिद्दत के साथ महसूस करते हैं।
स्याही के जरिए विचारों और संदेश को अपनों तक पहुंचाने का माध्यम पोस्टकार्ड, जो अतीत की पोटली बेहद सुहानी यादों को सहेजता था। अब दौर बदलने से मोबाइल युग में गुम हो चुके पोस्टकार्ड को नए कलेवर में परोस सबके दिलों में पोस्टकार्ड की पुरानी यादों को ताज़ा करने का भी यह एक नया प्रयोग है। इसे खास तौर से भारतीय सेना के उन जवानों को समर्पित किया जा रहा है जो दूर दराज़ के इलाकों में परिवार से काफी दूर देश की सेवा में दिन रात लगे रहते हैं और जिनके लिए आज भी पोस्टकार्ड और डाक विभाग ही संपर्क का एक ज़रिया है।
इस प्रदर्शनी को इस रूप में प्रस्तुत करने के लिए तमाम अनुभवी कलाकारों, कवियों,लेखकों के अलावा बहुत से ऐसे व्यक्तियों से भी मिलने का मौका मिला जिन्होंने इस विषय पर अपने अपने अनुभव और प्रयोग को साझा किया। जिससे हमें अपने इस अनोखे प्रयोग में और भी साहस, ऊर्जा मिला।
पूरे भारत मे इस प्रदर्शनी में आमंत्रित करने के लिए आधुनिक संसाधनों का प्रयोग किया गया जिससे लोगों तक इस प्रदर्शनी का उद्देश्य प्राप्त हो पाया और भरपूर मात्रा में लोगों ने अपनी अभिव्यक्ति को पोस्टकार्ड के माध्यम से हम तक पहुचाये। और हम इस प्रदर्शनी के माध्यम से आपतक पहुचाने में सफल हुए। वैसे पोस्टकार्ड को लेकर कला के माध्यम से देश मे अनेको प्रदर्शनी और प्रयोग किये जा चुके हैं लेकिन उत्तर प्रदेश में पहली बार सप्रेम संस्थान और डॉट आर्ट फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में यह पहला प्रयोग है। जहाँ अलग अलग विधाओ को एक साथ एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया। पूरे भारत मे एक उद्देश्य की भांति प्रचार प्रसार किया गया। जिससे आज इस प्रदर्शनी में पूरे भारत के उत्तर प्रदेश, दिल्ली,महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश,असम,झारखंड, कोलकाता, वेस्ट बंगाल, तमिलनाडु, हिमांचल प्रदेश,राजस्थान, गुजरात से लगभग 300 कलाकार,कवि,फोटोग्राफर, कार्टूनिस्ट, फ़िल्म, रंगमंच, लेखक, बच्चे और आम जन की भागीदारी से लगभग 450 पोस्टकार्ड पर बने व लिखे कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया। जो कि भारतीय सेना के प्रति एक भावनाओं की अभिव्यक्ति है।
इस संबंध में भारत के विख्यात वरिष्ठ कलाकारों , कवियों आदि के भी कलाकृतियों ,कविताओं को एक निवेदन पर प्राप्त कर के शामिल किया गया । हालांकि की कुछ वरिष्ठ व युवा कलाकारों को विषय मे न बांधकर स्वतंत्र रूप से अपने हस्ताक्षर को कला और कविता के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था।
इस कला प्रदर्शनी के आयोजन के मुख्य उद्देश्य और विशेषता को आधार को मूल केंद्र में रखते हुए भारत के प्रमुख कला समीक्षक, लेखक रविन्द्र त्रिपाठी ( कला, फ़िल्म समीक्षक) ग़ाज़ियाबाद उत्तर प्रदेश, उमा नायर ( कला समीक्षक, क्यूरेटर) नई दिल्ली, सुमन कुमार सिंह (लेखक , कला समीक्षक) ग़ाज़ियाबाद, अभिषेक कश्यप (कथाकार, कला समीक्षक संस्थापक निदेशक, धनबाद आर्ट फेयर) धनबाद, झारखंड , वंदना सहगल (क्यूरेटर ) लखनऊ उत्तर प्रदेश ने अपने लेख रूप में इस प्रदर्शनी में महत्वपूर्ण योगदान दिया । इस प्रदर्शनी में कलाकृतियों को इंस्टालेशन आर्ट के माध्यम से प्रदर्शन करने और कलात्मक रूप देने का श्रेय चित्रकार धीरज यादव को जाता है।
.कला से जुड़े सभी विधाओं के लोगों ने भारतीय सेना के लिए अपनी भावनाओं को पोस्टकार्ड के कैनवास पर विभिन्न माध्यमों में बनाकर,लिखकर भेजा है जो इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया है।
शहर के सभी विधाओं से जुड़े कलाकार, कलाप्रेमी, और आम जन से अपील है कि उत्तर प्रदेश में पहली बार इस प्रकार की प्रदर्शनी का अवलोकन अवश्य करें । यह प्रदर्शनी 16 जुलाई से 22 जुलाई तक प्रतिदिन 11बजे से सायं 7 बजे तक ललित कला अकादमी, क्षेत्रीय केंद्र अलीगंज लखनऊ के वीथिका नम्बर 1 में लगी रहेगी।

 

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